अर्जुन कहते हैं — आपका न आदि है, न मध्य, न अंत। आपकी शक्ति अनंत है, भुजाएं अनगिनत हैं। चंद्रमा और सूर्य आपके नेत्र हैं। आपके मुख से प्रज्वलित अग्नि निकल रही है और आप अपने तेज से समस्त जगत को तपा रहे हैं।
सूर्य-चंद्र को नेत्र कहना एक पुरातन वैदिक उपमा है। जैसे सूर्य दिन में जगत को देखता है और चंद्रमा रात में — वैसे ही परमात्मा की दृष्टि सदा सक्रिय है।