यह दसवें अध्याय का अंतिम श्लोक है — और पूरी गीता के सबसे प्रभावशाली वाक्यों में से एक। कृष्ण कहते हैं — अर्जुन, इन सब बातों को जानने से तुम्हें क्या मिलेगा? बस इतना जान लो — मैं अपने एक अंश से इस पूरे जगत को धारण करके बैठा हूँ। एक अंश में पूरा जगत समाया है।
यह वाक्य मन को विस्मय से भर देता है। पूरी विभूति-सूची — सूर्य, चंद्रमा, महर्षि, नदियाँ, पर्वत, सब — वह केवल एक अंश में है। बाकी अनंत अंश? वे अनकहे हैं, अकल्पनीय हैं। यही विभूतियोग का परम रहस्य है।