यह श्लोक चौंकाता है — 'द्यूतं छलयताम्' — छलनेवालों में मैं जुआ हूँ। यह बात तब समझ में आती है जब हम गीता की व्यापक दृष्टि देखते हैं। परमात्मा सब वर्गों में सबसे प्रमुख हैं — चाहे वह वर्ग शुभ हो या अशुभ। यह सर्वव्यापकता का बयान है, जुए की प्रशंसा नहीं।
विजय, उद्यम और सत्त्व — ये तीन सकारात्मक विभूतियाँ हैं। जीत में परमात्मा हैं — इसीलिए जब कोई अच्छे काम में जीतता है, वह उत्सव परमात्मा का उत्सव है। उद्यम — दृढ़ संकल्प और परिश्रम — वह भी परमात्मा की शक्ति है।