'हन्त' — यह एक बड़ा मीठा शब्द है। इसका अर्थ है — अच्छा, ठीक है, हाँ। जैसे एक दादा-दादी बच्चे की बात सुनकर प्रेम से कहें — अच्छा, सुनो तो। यहाँ कृष्ण यही भाव रखते हैं। अर्जुन ने तीन बार माँगा, कृष्ण ने 'हन्त' कहकर स्वीकार किया।
लेकिन कृष्ण एक बात पहले ही बता देते हैं — मेरे विस्तार का कोई अंत नहीं है। जो बताऊँगा, वह प्रमुख उदाहरण हैं — पूरी सूची नहीं। यह ईमानदारी है। 10.42 में भी यही बात दोहराई जाएगी।