अर्जुन अब सीधे माँग रहा है — पूरी-पूरी बताइए, कुछ शेष मत छोड़िए। वह जानना चाहता है कि किन विभूतियों के द्वारा कृष्ण इन सब लोकों में व्याप्त हैं। यह प्रश्न ही अगले अठारह श्लोकों की विभूति-सूची का आधार है।
'व्याप्य तिष्ठसि' — व्याप्त होकर रहते हैं। यह शब्द बहुत महत्वपूर्ण है। कृष्ण केवल स्वर्ग में नहीं हैं — वे पर्वत में, नदी में, सूर्य में, मन में — सब जगह व्याप्त हैं। यही विभूतियोग का मूल दर्शन है।