यहाँ अर्जुन एक गहरी बात कह रहा है — आप खुद को खुद से जानते हैं। किसी और को पूछने की जरूरत नहीं। यह परमात्मा का स्वयंज्ञान है। जैसे दीपक को अपना प्रकाश दिखाने के लिए किसी और प्रकाश की जरूरत नहीं — परमात्मा को जानने के लिए किसी बाहरी प्रमाण की जरूरत नहीं।
फिर चार संबोधन — भूतभावन, भूतेश, देवदेव, जगत्पति। ये चारों कृष्ण की व्यापकता दिखाते हैं। वे भूतों के जन्मदाता भी हैं, उनके स्वामी भी, देवों के भी देव, और पूरे जगत के पालक भी।