अर्जुन का यह वचन बहुत महत्वपूर्ण है। वह कह रहा है — हे केशव, आप जो कुछ कह रहे हैं, मैं उसे पूरी तरह सच मानता हूँ। यह श्रद्धा है। तर्क नहीं, प्रमाण नहीं — अर्जुन को कृष्ण के प्रति पूर्ण विश्वास है।
फिर वह जोड़ता है — न देव, न दानव — कोई आपके स्वरूप को नहीं जान सकते। यह 10.2 की बात को अर्जुन अपने शब्दों में दोहरा रहा है। अब तक सुना था, अब आत्मसात किया।