अर्जुन यहाँ अपनी स्तुति को दृढ़ करता है। वह कहता है — यह मैंने नहीं सोचा, बड़े-बड़े ऋषियों ने यही कहा है — नारद, असित, देवल और स्वयं वेद व्यास। और अब आप स्वयं भी यही बता रहे हैं। यानी अर्जुन की बात में तीन प्रमाण हैं — परंपरा, ऋषि-वचन, और गुरु का स्वयं कहना।
यहाँ व्यास का उल्लेख महत्वपूर्ण है। व्यास वही हैं जिन्होंने महाभारत लिखा, जिसमें गीता है। अर्जुन व्यास को प्रमाण मान रहा है — और यह व्यास की ही रचना में लिखा है। यह एक गहरी काव्यात्मक संरचना है।