अर्जुन का यह प्रश्न बहुत व्यावहारिक है। वह कह रहा है — ठीक है, मैं ध्यान करूँगा, लेकिन किस रूप में? किन-किन चीजों में आपको देखूँ? यह प्रश्न उन सबका है जो परमात्मा को पूजना चाहते हैं लेकिन अमूर्त से उन्हें पकड़ना मुश्किल लगता है।
यहाँ 'केषु केषु' दोहराया गया है — किन-किन में। यह जिज्ञासा की गहराई दिखाता है। अर्जुन एक-दो उदाहरण नहीं चाहता — वह समग्र समझना चाहता है। इसीलिए कृष्ण आगे विस्तृत सूची देंगे।