दुर्योधन पाण्डव पक्ष के योद्धाओं की सूची पूरी करता है। वह कहता है कि पराक्रमी युधामन्यु, बलवान उत्तमौजा, सुभद्रा के पुत्र अभिमन्यु और द्रौपदी के पाँचों पुत्र — ये सभी महारथी हैं।
अभिमन्यु का नाम विशेष रूप से ध्यान खींचता है। वह अर्जुन और सुभद्रा का पुत्र था — अर्थात कृष्ण का भानजा भी। अभी तो वह युवा था, लेकिन आगे चलकर चक्रव्यूह में उसकी वीरता और बलिदान महाभारत के सबसे मार्मिक प्रसंगों में से एक बना।
द्रौपदी के पाँच पुत्र — प्रतिविन्ध्य, सुतसोम, श्रुतकर्मा, शतानीक और श्रुतसेन — पाँचों पाण्डवों से एक-एक पुत्र। ये सभी वीर योद्धा थे। दुर्योधन इन सबको "महारथी" कहकर स्वीकार करता है कि पाण्डव पक्ष की शक्ति असाधारण है।