दुर्योधन पाण्डव सेना के और योद्धाओं के नाम गिनाता जाता है। धृष्टकेतु चेदि देश के राजा थे, चेकितान यादव कुल के प्रसिद्ध वीर थे, और काशी के राजा अपने पराक्रम के लिए जाने जाते थे। ये सब पाण्डवों के पक्ष में खड़े थे।
पुरुजित और कुन्तिभोज कुन्ती माता के परिवार से थे — अर्थात पाण्डवों के मामा-पक्ष के योद्धा। शैब्य शिबि देश के नरश्रेष्ठ राजा थे। इन सबका नाम लेकर दुर्योधन यह जताना चाहता है कि पाण्डवों ने चारों दिशाओं से सहायता जुटाई है।
जब कोई व्यक्ति अपने प्रतिद्वन्द्वी की ताकत बार-बार गिनाए, तो समझ लो कि भीतर से वह डरा हुआ है। दुर्योधन की यह लम्बी सूची उसके आत्मविश्वास की कमी को दर्शाती है।