📿 श्लोक संग्रह

अत्र शूरा महेष्वासाः

गीता 1.4 भगवद्गीता
📖 भगवद्गीता, अध्याय 1 — अर्जुनविषादयोग
अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि ।
युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः ॥
अत्र
यहाँ (इस सेना में)
शूराः
शूरवीर
महेष्वासाः
महान धनुर्धर
भीमार्जुनसमाः
भीम और अर्जुन के समान
युधि
युद्ध में
युयुधानः
सात्यकि
विराटः
राजा विराट
द्रुपदः
राजा द्रुपद
महारथः
महारथी (महान योद्धा)

दुर्योधन पाण्डव सेना के योद्धाओं के नाम गिनाना शुरू करता है। वह कहता है — "इस सेना में ऐसे शूरवीर और महान धनुर्धर हैं जो युद्ध में भीम और अर्जुन के समान हैं।" फिर वह तीन नाम लेता है — सात्यकि, राजा विराट और महारथी द्रुपद।

सात्यकि यादव वंश के वीर थे और कृष्ण के अनुयायी। राजा विराट वही हैं जिनके राज्य में पाण्डवों ने अज्ञातवास बिताया था। द्रुपद द्रौपदी के पिता थे और कौरवों के कट्टर शत्रु। ये सभी अनुभवी और भयंकर योद्धा थे।

दुर्योधन इन नामों को गिनाकर द्रोणाचार्य को सचेत कर रहा है कि सामने की सेना को हल्के में लेना ठीक नहीं होगा। उसकी गिनती में डर भी झलकता है और सावधानी भी।

श्लोक 1.4 से 1.6 तक दुर्योधन पाण्डव पक्ष के प्रमुख योद्धाओं की सूची प्रस्तुत करता है। यह सूची न केवल सैन्य जानकारी देती है, बल्कि महाभारत के विभिन्न पात्रों का परिचय भी कराती है।

"भीमार्जुनसमा" — भीम और अर्जुन के समान — यह तुलना बताती है कि दुर्योधन भीम और अर्जुन को सबसे बड़ा ख़तरा मानता था।

अध्याय 1 · 4 / 47
← पिछला अध्याय 1 · 4 / 47 अगला →