दुर्योधन पाण्डव सेना के योद्धाओं के नाम गिनाना शुरू करता है। वह कहता है — "इस सेना में ऐसे शूरवीर और महान धनुर्धर हैं जो युद्ध में भीम और अर्जुन के समान हैं।" फिर वह तीन नाम लेता है — सात्यकि, राजा विराट और महारथी द्रुपद।
सात्यकि यादव वंश के वीर थे और कृष्ण के अनुयायी। राजा विराट वही हैं जिनके राज्य में पाण्डवों ने अज्ञातवास बिताया था। द्रुपद द्रौपदी के पिता थे और कौरवों के कट्टर शत्रु। ये सभी अनुभवी और भयंकर योद्धा थे।
दुर्योधन इन नामों को गिनाकर द्रोणाचार्य को सचेत कर रहा है कि सामने की सेना को हल्के में लेना ठीक नहीं होगा। उसकी गिनती में डर भी झलकता है और सावधानी भी।