अर्जुन कहते हैं — हे माधव, इसलिए हम अपने बान्धव धार्तराष्ट्रों को मारने के योग्य नहीं हैं। अपने ही लोगों को मारकर हम कैसे सुखी हो सकते हैं?
यह एक बहुत सीधा-सा तर्क है जो हर व्यक्ति समझ सकता है। जैसे परिवार में कोई झगड़ा हो जाए तो भले ही एक पक्ष जीत जाए, पर खुशी किसी को नहीं मिलती। जीतने वाला भी दुखी रहता है क्योंकि अपनों को हराया है।
अर्जुन यहाँ 'स्वबान्धवान्' शब्द का प्रयोग करते हैं — अर्थात ये केवल शत्रु नहीं, ये हमारे अपने बन्धु-बान्धव हैं। यह शब्द उनके दर्द को और गहरा बनाता है।