अर्जुन कहते हैं — हे मधुसूदन, भले ही ये लोग मुझे मारें, फिर भी मैं इन्हें मारना नहीं चाहता। तीनों लोकों का राज्य मिल जाए तब भी नहीं, फिर इस छोटी-सी पृथ्वी के लिए तो बात ही क्या है!
यहाँ अर्जुन अपने प्रेम और करुणा को स्पष्ट करते हैं। जैसे कोई माँ अपने बच्चे को कभी हानि नहीं पहुँचाना चाहती, चाहे बच्चा कितनी भी गलती करे — वैसे ही अर्जुन अपने कुल के लोगों को किसी भी कीमत पर नहीं मारना चाहते।
यह श्लोक अर्जुन की गहरी मानवीय संवेदना को दर्शाता है। वे एक ऐसे योद्धा हैं जिनका हृदय प्रेम से भरा है।