यह श्लोक बड़ा रोचक है क्योंकि "अपर्याप्त" और "पर्याप्त" शब्दों के दो अर्थ निकलते हैं। एक अर्थ के अनुसार दुर्योधन कहता है — "भीष्म द्वारा रक्षित हमारी सेना असीमित (अपार) है, जबकि भीम द्वारा रक्षित पाण्डवों की सेना सीमित है।" यह उसका आत्मविश्वास दिखाता है।
लेकिन दूसरा अर्थ उलटा है — "हमारी सेना अपर्याप्त (कम) है, जबकि उनकी सेना पर्याप्त (काफ़ी) है।" यह दुर्योधन के भीतर छिपे भय को प्रकट करता है। अनेक विद्वान मानते हैं कि दुर्योधन अनजाने में अपना डर प्रकट कर बैठा।
भीष्म और भीम — दोनों नाम एक जैसे लगते हैं लेकिन दोनों अलग-अलग पक्षों में हैं। भीष्म कौरव सेना के सेनापति हैं, भीम पाण्डव पक्ष के सबसे बलशाली योद्धा। दुर्योधन दोनों की तुलना करके अपनी सेना को बड़ा दिखाने का प्रयास करता है।