भगवद्गीता का पहला श्लोक अंधे राजा धृतराष्ट्र के प्रश्न से शुरू होता है। वे अपने मंत्री सञ्जय से पूछते हैं — "धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में मेरे और पाण्डु के पुत्र युद्ध की इच्छा से इकट्ठे हुए, तो उन्होंने क्या किया?" यह प्रश्न एक पिता की चिन्ता भी है और एक राजा की जिज्ञासा भी।
ध्यान दीजिए कि धृतराष्ट्र ने "धर्मक्षेत्रे" शब्द का प्रयोग किया — अर्थात वे जानते थे कि कुरुक्षेत्र धर्म की भूमि है। जहाँ धर्म होता है, वहाँ अधर्म टिक नहीं सकता। शायद उनके मन में यह भय भी था कि धर्मभूमि में खड़े होकर उनके पुत्रों का मन बदल न जाए।
यह श्लोक पूरी गीता का द्वार है — एक साधारण-सा प्रश्न, जिसके उत्तर में भगवान कृष्ण का सम्पूर्ण उपदेश सामने आता है।