एक जंगल में एक सियार रहता था। एक दिन भूख के मारे वह गाँव में घुस आया। कुत्तों ने उसे देखा और पीछे दौड़ पड़े।
भागते-भागते सियार एक रँगरेज़ के घर में घुस गया। वहाँ नील के रंग से भरा एक बड़ा घड़ा रखा था। सियार उसमें गिर पड़ा।
किसी तरह निकला, तो सारा शरीर नीला हो गया था। कुत्तों ने उसे देखा और डरकर भाग गए। सियार समझ गया — नया रंग काम का है।
वह जंगल में वापस आया। जानवरों ने उसे देखा — ऐसा नीला जानवर तो कभी नहीं देखा! सब डरकर दूर हट गए।
सियार बोला, 'मैं भगवान का भेजा हुआ हूँ। मुझे इस जंगल का राजा बनाया गया है।' सारे जानवर मान गए। शेर, हाथी, बाघ — सब उसके सामने झुकने लगे।
सियार मज़े से रहने लगा। पर एक रात उसने जंगल में सियारों का समूह देखा। वे मिलकर रो रहे थे — उनकी आवाज़ सुनकर उसके मन में कुछ हुआ।
वह रुक न सका। उसके मुँह से भी वही सियार की आवाज़ निकल पड़ी — हुआ... हुआ... हुआ! सब जानवर चौंक गए। शेर ने पहचाना — यह तो सियार है! सारा झूठ खुल गया।