श्री सूक्त वैदिक साहित्य में लक्ष्मी देवी का सबसे प्राचीन स्तोत्र माना जाता है। इसके पहले मंत्र में अग्निदेव से प्रार्थना की गई है कि वे लक्ष्मी देवी को बुलाकर लाएँ। लक्ष्मी का वर्णन किया गया है — उनका रंग सुनहरा है, वे सोने-चाँदी की मालाओं से सुशोभित हैं।
उन्हें 'चन्द्रा' कहा गया है — अर्थात चन्द्रमा की तरह शीतल और सुखद। जैसे चाँदनी रात में शांत प्रकाश देती है, वैसे ही लक्ष्मी का आगमन घर में शांति और समृद्धि लाता है। उन्हें 'हिरण्मयी' कहा गया — जो स्वयं स्वर्ण-स्वरूपा हैं।
यहाँ ध्यान देने वाली बात है कि लक्ष्मी केवल धन की देवी नहीं हैं — परंपरा में उन्हें समृद्धि, सौभाग्य, कल्याण और गृहस्थ जीवन की पूर्णता का प्रतीक माना जाता रहा है।