📿 श्लोक संग्रह

शान्ताकारं भुजगशयनं

विष्णु ध्यान श्लोक पुराण स्तोत्र
📖 पद्म पुराण
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् ।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥
शान्ताकारम्
शांत स्वरूप वाले
भुजगशयनम्
साँप (शेषनाग) की शय्या पर सोने वाले
पद्मनाभम्
कमल जिनकी नाभि से निकला
सुरेशम्
देवताओं के ईश्वर
विश्वाधारम्
विश्व के आधार
गगनसदृशम्
आकाश के समान
मेघवर्णम्
बादल जैसे रंग वाले
शुभाङ्गम्
सुंदर अंगों वाले
लक्ष्मीकान्तम्
लक्ष्मी के पति
कमलनयनम्
कमल जैसे नेत्रों वाले
भवभयहरम्
संसार के भय को हरने वाले
सर्वलोकैकनाथम्
सब लोकों के एकमात्र स्वामी

यह श्लोक भगवान विष्णु का ध्यान श्लोक है। इसमें उनके स्वरूप का ऐसा वर्णन है जो सुनते ही मन में एक शांत, सुंदर दृश्य बन जाता है। कल्पना करो — क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर भगवान विष्णु लेटे हैं, उनका रंग बादलों जैसा नीला है, उनकी नाभि से एक कमल निकला है।

उनका आकार शांत है — शान्ताकारम्। यह बड़ा सुंदर शब्द है। भगवान विष्णु का स्वरूप ही शांति का प्रतीक है। जैसे गहरी रात में शांत समुद्र दिखता है — विशाल, गहरा, स्थिर — वैसा ही उनका स्वरूप है।

अंत में कहा गया है — ऐसे भगवान विष्णु को वंदन है जो संसार के भय को हरने वाले हैं और सब लोकों के एकमात्र स्वामी हैं। यह श्लोक विष्णु के ध्यान के लिए सबसे प्रचलित श्लोकों में गिना जाता रहा है।

यह ध्यान श्लोक पद्म पुराण में मिलता है। विष्णु की पूजा या ध्यान से पहले इस श्लोक का पाठ करने की परंपरा रही है। इसमें भगवान विष्णु के सभी प्रमुख चिह्नों का उल्लेख है — शेषनाग, कमल, नीला वर्ण, लक्ष्मी।

परंपरा में यह श्लोक लगभग हर विष्णु मंदिर में और हर विष्णु-पूजा के आरंभ में सुनने को मिलता रहा है। इसकी सरलता और सुंदरता के कारण यह बहुत लोकप्रिय है।

पुराण स्तोत्र · 4 / 8
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