यह श्लोक भगवान विष्णु का ध्यान श्लोक है। इसमें उनके स्वरूप का ऐसा वर्णन है जो सुनते ही मन में एक शांत, सुंदर दृश्य बन जाता है। कल्पना करो — क्षीरसागर में शेषनाग की शय्या पर भगवान विष्णु लेटे हैं, उनका रंग बादलों जैसा नीला है, उनकी नाभि से एक कमल निकला है।
उनका आकार शांत है — शान्ताकारम्। यह बड़ा सुंदर शब्द है। भगवान विष्णु का स्वरूप ही शांति का प्रतीक है। जैसे गहरी रात में शांत समुद्र दिखता है — विशाल, गहरा, स्थिर — वैसा ही उनका स्वरूप है।
अंत में कहा गया है — ऐसे भगवान विष्णु को वंदन है जो संसार के भय को हरने वाले हैं और सब लोकों के एकमात्र स्वामी हैं। यह श्लोक विष्णु के ध्यान के लिए सबसे प्रचलित श्लोकों में गिना जाता रहा है।