विष्णु सहस्रनाम का यह पहला श्लोक है। इसमें भगवान विष्णु के पहले नौ नाम आए हैं। हर नाम उनके एक गुण को बताता है। जैसे 'विश्वम्' का अर्थ है कि यह पूरा विश्व उन्हीं का रूप है, और 'विष्णुः' का अर्थ है कि वे सर्वत्र व्याप्त हैं।
इसे ऐसे समझो — जैसे एक माँ अपने बच्चे के लिए कभी खाना बनाती है, कभी लोरी सुनाती है, कभी सिखाती है — एक ही माँ कई रूपों में काम करती है। वैसे ही भगवान विष्णु एक ही हैं, लेकिन उनके अनगिनत नाम उनके अनगिनत कामों को बताते हैं।
इस श्लोक में 'भूतकृत्' (बनाने वाले), 'भूतभृत्' (पालने वाले), और 'भूतभावनः' (उत्पन्न करने वाले) — ये तीन नाम मिलकर बताते हैं कि सृष्टि का बनाना, चलाना और पालना — तीनों काम भगवान करते हैं।