📿 श्लोक संग्रह

सिन्दूरारुणविग्रहां

ललिता सहस्रनाम, ध्यान श्लोक पुराण स्तोत्र
📖 ब्रह्मांड पुराण, ललितोपाख्यान
सिन्दूरारुणविग्रहां त्रिनयनां माणिक्यमौलिस्फुरत्
तारानायकशेखरां स्मितमुखीमापीनवक्षोरुहाम् ।
पाणिभ्यामलिपूर्णरत्नचषकं रक्तोत्पलं बिभ्रतीं
सौम्यां रत्नघटस्थरक्तचरणां ध्यायेत्परामम्बिकाम् ॥
सिन्दूरारुण
सिन्दूर जैसी लाल आभा वाली
विग्रहाम्
स्वरूप वाली
त्रिनयनाम्
तीन नेत्रों वाली
माणिक्यमौलि
माणिक्य (रत्न) के मुकुट वाली
तारानायकशेखराम्
चन्द्रमा को शिरोभूषण बनाने वाली
स्मितमुखीम्
मुस्कान वाले मुख वाली
रक्तोत्पलम्
लाल कमल
बिभ्रतीम्
धारण करने वाली
सौम्याम्
सौम्य, शांत
परामम्बिकाम्
परम अम्बिका (सर्वोच्च माता)
ध्यायेत्
ध्यान करे

यह ललिता सहस्रनाम का ध्यान श्लोक है। इसमें देवी के स्वरूप का बहुत सुंदर वर्णन किया गया है। उनकी आभा सिन्दूर जैसी लाल है, उनके तीन नेत्र हैं, सिर पर माणिक्य का मुकुट है और चन्द्रमा शिरोभूषण के रूप में सुशोभित है।

देवी के मुख पर कोमल मुस्कान है — जैसे कोई माँ अपने बच्चे को देखकर मुस्कुराती है। उनके हाथों में रत्नजड़ित पात्र और लाल कमल है। यह पूरा वर्णन ऐसा है जैसे कोई दादी अपनी पोती को माँ का चित्र शब्दों में बना रही हो।

अंत में कहा गया है — ऐसी सौम्य, शांत, परम अम्बिका का ध्यान करना चाहिए। यहाँ 'सौम्या' और 'अम्बिका' — दोनों शब्द माँ के कोमल और स्नेहपूर्ण रूप को बताते हैं।

ललिता सहस्रनाम ब्रह्मांड पुराण के ललितोपाख्यान भाग में आता है। इसमें देवी ललिता (त्रिपुरसुन्दरी) के एक हज़ार नाम हैं। यह ध्यान श्लोक सहस्रनाम के आरंभ में आता है और इसे पढ़कर देवी के स्वरूप का ध्यान किया जाता है।

परंपरा में ललिता सहस्रनाम को शाक्त संप्रदाय का एक प्रमुख स्तोत्र माना जाता रहा है।

पुराण स्तोत्र · 3 / 8
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