यह ललिता सहस्रनाम का ध्यान श्लोक है। इसमें देवी के स्वरूप का बहुत सुंदर वर्णन किया गया है। उनकी आभा सिन्दूर जैसी लाल है, उनके तीन नेत्र हैं, सिर पर माणिक्य का मुकुट है और चन्द्रमा शिरोभूषण के रूप में सुशोभित है।
देवी के मुख पर कोमल मुस्कान है — जैसे कोई माँ अपने बच्चे को देखकर मुस्कुराती है। उनके हाथों में रत्नजड़ित पात्र और लाल कमल है। यह पूरा वर्णन ऐसा है जैसे कोई दादी अपनी पोती को माँ का चित्र शब्दों में बना रही हो।
अंत में कहा गया है — ऐसी सौम्य, शांत, परम अम्बिका का ध्यान करना चाहिए। यहाँ 'सौम्या' और 'अम्बिका' — दोनों शब्द माँ के कोमल और स्नेहपूर्ण रूप को बताते हैं।