गायत्री मंत्र वेदों का सबसे प्रसिद्ध मंत्र है। इसमें सविता देवता (सूर्य के प्रेरक रूप) से प्रार्थना की गई है कि वे हमारी बुद्धि को सही रास्ते पर ले जाएँ। जैसे सूरज उगता है तो अँधेरा अपने आप दूर हो जाता है — वैसे ही सविता देवता का प्रकाश मन के अँधेरे को दूर करता है।
इस मंत्र की शुरुआत 'ॐ भूर्भुवः स्वः' से होती है — ये तीनों लोकों (पृथ्वी, अंतरिक्ष और स्वर्ग) के नाम हैं। इसके बाद सविता देवता के सर्वश्रेष्ठ तेज का ध्यान किया गया है। और अंत में प्रार्थना है — हमारी बुद्धि को सही दिशा में प्रेरित करो।
यह मंत्र एक सुंदर प्रार्थना है। इसमें कोई माँग नहीं है — न धन की, न सुख की, न शक्ति की। बस एक ही विनती है — हमारी बुद्धि ठीक रहे, हम सही-ग़लत की पहचान कर सकें। परंपरा में इसे सबसे ऊँची प्रार्थना माना जाता रहा है।