श्री रुद्रम् वैदिक साहित्य में भगवान रुद्र (शिव) की सबसे प्रमुख स्तुति है। इसका पहला मंत्र अत्यंत विनम्र है — हे रुद्र, आपके क्रोध को नमस्कार! आपके बाण को नमस्कार! आपके धनुष को नमस्कार! और आपकी दोनों भुजाओं को नमस्कार!
यह स्तुति अनोखी है क्योंकि यहाँ भक्त भगवान की कोमलता को ही नहीं, बल्कि उनके भयंकर रूप को भी नमस्कार कर रहा है। जैसे एक बच्चा अपने पिता से कहे — पापा, आपकी डाँट को भी नमस्कार, क्योंकि वह भी मेरी भलाई के लिए है। रुद्र का क्रोध भी कल्याण के लिए है।
हर चीज़ को 'नमः' कहना — यह पूर्ण समर्पण है। न केवल सुख को, बल्कि कठिनाई को भी स्वीकार करना। यह वैदिक भक्ति की विशेषता है — सब कुछ ईश्वर का है, सब कुछ में ईश्वर है।