लिंगाष्टकम् शिवलिंग की स्तुति के आठ श्लोकों का स्तोत्र है। इसके पहले श्लोक में बताया गया है कि यह शिवलिंग ब्रह्मा, विष्णु (मुरारि) और समस्त देवताओं द्वारा पूजित है। अर्थात सृष्टि के रचयिता और पालनकर्ता भी इस लिंग की पूजा करते हैं।
यह लिंग निर्मल प्रकाश से शोभित है — जैसे सुबह का पहला सूर्यप्रकाश शुद्ध और निर्मल होता है, वैसे ही शिवलिंग की आभा पवित्र और शांत है। और यह लिंग जन्म से आए सब दुःखों का नाश करने वाला है।
हर पंक्ति के अंत में 'लिङ्गम्' शब्द आता है — यह पूरे स्तोत्र में एक लय बनाता है। और अंत में कहा गया — ऐसे सदाशिव के लिंग को मैं प्रणाम करता हूँ। यह सरल भक्ति है — देखो, समझो, और प्रणाम करो।