यहाँ कृष्ण एक सुंदर उदाहरण देते हैं। हवा कितनी भी बड़ी हो, वह आकाश में ही रहती है — आकाश उसे थामे रखता है। वैसे ही सभी प्राणी — छोटे-बड़े, सुंदर-कुरूप — सभी मुझमें ही स्थित हैं।
यह उपमा बड़ी सटीक है। वायु आकाश को नहीं बाँधती, आकाश वायु को नहीं रोकता — दोनों अपने-अपने स्वभाव में हैं, फिर भी वायु का अस्तित्व आकाश के बिना नहीं। परमात्मा और जीव का रिश्ता ऐसा ही है।