कृष्ण कहते हैं — यह मेरा दिव्य योग है। मैं सब प्राणियों को धारण करता हूँ, पर मैं उनमें बंधा नहीं हूँ। जैसे धरती सभी पेड़-पौधों को थामे रखती है, पर धरती खुद पेड़ नहीं बनती।
यह श्लोक 9.4 का विस्तार है। दोनों मिलकर परमात्मा के उस स्वभाव को दिखाते हैं जो सर्वत्र है, फिर भी किसी एक में बंधा नहीं। इसे कृष्ण 'ऐश्वर योग' — ईश्वर का विशेष योग — कहते हैं।