पूरे नौवें अध्याय का सार इस एक श्लोक में आ जाता है। भगवान कहते हैं — मुझमें मन लगाओ, मेरे भक्त बनो, मेरा यजन करो, मुझे नमन करो। बस इतना करो।
और परिणाम? — 'मामेवैष्यसि' — मुझे ही पाओगे। 'मत्परायणः' — जो मुझे परम लक्ष्य माने। यह पूरा अध्याय एक बड़े प्रश्न का उत्तर है — भगवान को कैसे पाएँ? — और यह श्लोक वह उत्तर है।