भगवान यहाँ सबसे सरल और सबसे गहरा उपाय बताते हैं। वे कहते हैं — जो भी करो — खाना हो, यज्ञ हो, दान हो, तप हो — उसे मुझे अर्पण करते हुए करो। बस इतना काफी है।
इस एक श्लोक में पूरा कर्मयोग समा जाता है। अलग से भक्ति के लिए समय निकालने की जरूरत नहीं — हर काम को भगवान को समर्पित करना ही भक्ति है।