कृष्ण कहते हैं — मैं इस जगत् का पिता हूँ, माता हूँ, धारण करने वाला हूँ, पितामह भी मैं हूँ। जो जानने योग्य है वह मैं हूँ, जो पवित्र करे वह मैं हूँ। और ओंकार भी मैं हूँ — ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद भी मैं।
यह श्लोक 9.16 की सूची को और गहरा करता है। अब कृष्ण परिवार के सभी रिश्तों में हैं — पिता भी, माता भी। और वेदों के रूप में वे ज्ञान के भी स्रोत हैं। सबका मूल एक ही है।