जो लोग परमात्मा को नहीं पहचानते, उनकी आशाएँ व्यर्थ जाती हैं, उनके कर्म निष्फल होते हैं, उनका ज्ञान भी काम नहीं आता। वे मोहिनी प्रकृति में फँसे रहते हैं।
यहाँ 'राक्षसी' और 'आसुरी' शब्द किसी जाति या वर्ग के लिए नहीं हैं — ये मन की अवस्थाओं के नाम हैं। जो परमात्मा को अनदेखा करे, वह मन राक्षसी भाव से ग्रस्त है।