कृष्ण कहते हैं — जो मूढ़ हैं, वे मुझे केवल मनुष्य समझते हैं। वे मेरे भीतर के परम स्वरूप को नहीं जान पाते। जो दिखता है उसे ही सब कुछ मान लेते हैं।
यह बात हमारे जीवन में भी लागू होती है। अक्सर हम किसी बुज़ुर्ग, किसी बच्चे, किसी साधारण व्यक्ति को देखकर उसकी गहराई नहीं समझ पाते — बस बाहर देखते हैं। कृष्ण के मानव अवतार में यही विरोधाभास सबसे तीव्र है।