कृष्ण कहते हैं — मेरी देखरेख में प्रकृति इस सारी सृष्टि को — चलने वाले और न चलने वाले सभी — उत्पन्न करती है। और इसी कारण यह संसार-चक्र घूमता रहता है।
जैसे एक बड़े घर में मालिक हो तो काम होते हैं — सब करने वाले अलग-अलग हैं, पर दिशा एक है। वैसे ही प्रकृति करती है, पर कृष्ण 'अध्यक्ष' हैं — साक्षी और आधार।