कृष्ण बता रहे हैं कि ध्यान में परमात्मा के किन गुणों का चिंतन करना चाहिए। वे कहते हैं — जो सर्वज्ञ हैं, सनातन हैं, सबके नियंता हैं, अणु से भी सूक्ष्म हैं, सबके पालनकर्ता हैं, जिनका रूप मन से भी परे है, जो सूर्य के समान प्रकाशमान हैं और अज्ञान के अंधकार से सर्वथा परे हैं — उनका स्मरण करो।
यह श्लोक परमात्मा का एक अद्भुत चित्र खींचता है। जैसे सूरज अंधेरे को दूर करता है, वैसे ही भगवान अज्ञान का अंधेरा मिटाते हैं। जैसे हवा हर जगह है पर दिखती नहीं — वैसे ही भगवान अणु से भी छोटे हैं, सबमें हैं, पर दिखते नहीं।
बड़े-बुज़ुर्ग कहते हैं — भगवान को समझना कठिन है, पर उन्हें महसूस करना सरल है। यह श्लोक उसी भाव से भरा है।