📿 श्लोक संग्रह

कविं पुराणमनुशासितारम्

गीता 8.9 भगवद्गीता
📖 भगवद्गीता, अध्याय 8 — अक्षरब्रह्मयोग
कविं पुराणमनुशासितारमणोरणीयांसमनुस्मरेद्यः ।
सर्वस्य धातारमचिन्त्यरूपमादित्यवर्णं तमसः परस्तात् ॥
कविम्
सर्वज्ञ
पुराणम्
अनादि, सनातन
अनुशासितारम्
सबका नियंता
अणोः अणीयांसम्
अणु से भी सूक्ष्म
अनुस्मरेत्
स्मरण करे
यः
जो
सर्वस्य धातारम्
सबका पालनकर्ता
अचिन्त्यरूपम्
अचिन्त्य स्वरूप वाला
आदित्यवर्णम्
सूर्य के समान प्रकाशमान
तमसः परस्तात्
अंधकार से परे

कृष्ण बता रहे हैं कि ध्यान में परमात्मा के किन गुणों का चिंतन करना चाहिए। वे कहते हैं — जो सर्वज्ञ हैं, सनातन हैं, सबके नियंता हैं, अणु से भी सूक्ष्म हैं, सबके पालनकर्ता हैं, जिनका रूप मन से भी परे है, जो सूर्य के समान प्रकाशमान हैं और अज्ञान के अंधकार से सर्वथा परे हैं — उनका स्मरण करो।

यह श्लोक परमात्मा का एक अद्भुत चित्र खींचता है। जैसे सूरज अंधेरे को दूर करता है, वैसे ही भगवान अज्ञान का अंधेरा मिटाते हैं। जैसे हवा हर जगह है पर दिखती नहीं — वैसे ही भगवान अणु से भी छोटे हैं, सबमें हैं, पर दिखते नहीं।

बड़े-बुज़ुर्ग कहते हैं — भगवान को समझना कठिन है, पर उन्हें महसूस करना सरल है। यह श्लोक उसी भाव से भरा है।

यह श्लोक 8.10 के साथ मिलकर एक पूर्ण विवरण देता है। 8.9 में परमात्मा के गुण बताए गए हैं, 8.10 में ध्यान की विधि बताई गई है।

"आदित्यवर्णं तमसः परस्तात्" — यह उपनिषदों की भाषा है। श्वेताश्वतर उपनिषद में भी इसी प्रकार के वर्णन मिलते हैं, जो बताते हैं कि परमात्मा प्रकाश-स्वरूप हैं।

अध्याय 8 · 9 / 28
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