कृष्ण कहते हैं — हे भरतश्रेष्ठ, अब मैं तुम्हें वह काल (समय) बताता हूँ जिसमें शरीर छोड़ने वाले योगी लौटते नहीं (मोक्ष पाते हैं) और जिसमें लौटते हैं (पुनर्जन्म लेते हैं)।
यह एक नए विषय की भूमिका है। अब तक कृष्ण ने बताया कि क्या स्मरण करें (8.5-8.14) और कहाँ पहुँचें (8.15-8.22)। अब वे बता रहे हैं कि शरीर छोड़ने का समय भी गति (मोक्ष या पुनर्जन्म) को प्रभावित करता है।
अगले दो श्लोकों (8.24-8.25) में दो मार्गों — शुक्ल गति (प्रकाश का मार्ग) और कृष्ण गति (अंधकार का मार्ग) — का वर्णन होगा।