कृष्ण योग-साधना की विधि बता रहे हैं। पहला चरण — शरीर के सभी द्वार (आँख, कान, नाक आदि इंद्रियाँ) बंद कर लो, अर्थात इंद्रियों को बाहरी विषयों से हटा लो। दूसरा — मन को हृदय में स्थिर करो। तीसरा — प्राण को मस्तक के शिखर पर ले जाओ।
यह ऐसे समझें — जैसे जब हम बहुत ध्यान से कोई बात सुनते हैं, तो आँखें अपने-आप बंद हो जाती हैं, कान सिर्फ एक दिशा में लगते हैं। वैसे ही योग में सारी इंद्रियों को भीतर की ओर मोड़ दिया जाता है।
यह श्लोक अगले श्लोक (8.13) के साथ मिलकर पूरी विधि बनाता है — यहाँ शरीर और मन की तैयारी बताई गई, वहाँ ओंकार का उच्चारण बताया जाएगा।