कृष्ण बताते हैं कि जगत परमात्मा को क्यों नहीं जान पाता — इच्छा और द्वेष के द्वंद्व के कारण। जन्म लेते ही सब प्राणी इस द्वंद्व-मोह में पड़ जाते हैं।
यह स्वाभाविक है। बच्चा पैदा होते ही रोता है — उसे कुछ चाहिए (इच्छा) और कुछ दुखदायी लगता है (द्वेष)। यह दोनों साथ आते हैं। और जब तक ये हैं, तब तक परमात्मा को जानना कठिन है।
'सर्गे' — जन्म के साथ ही यह मोह आता है। यह कोई व्यक्तिगत गलती नहीं — यह संसार की प्रकृति है। लेकिन इसे पार किया जा सकता है — अगला श्लोक बताएगा कैसे।