कृष्ण कहते हैं — मैं सभी प्राणियों के भूत, वर्तमान और भविष्य को जानता हूँ। लेकिन मुझे कोई नहीं जानता।
जैसे एक किसान अपने खेत की हर मिट्टी को जानता है, लेकिन मिट्टी किसान को नहीं जान सकती। परमात्मा सबको जानता है, लेकिन वह स्वयं ज्ञान के विषय के रूप में किसी की पकड़ में नहीं आता।
यह श्लोक 7.25 की बात को आगे ले जाता है — माया के कारण जगत उन्हें नहीं जानता। और 7.27 में कारण आएगा — द्वंद्व-मोह।