7.19 में ज्ञानी की बात थी जो 'वासुदेवः सर्वम्' जान लेता है। यहाँ उनकी बात है जिनकी कामनाओं ने ज्ञान ढँक लिया है। ऐसे लोग अपनी-अपनी इच्छाओं के अनुसार अलग-अलग देवताओं की उपासना करते हैं।
यह कोई निंदा नहीं है। जैसे बाज़ार में जाने वाले अलग-अलग दुकानों में जाते हैं अपनी जरूरत के अनुसार — वैसे ही लोग अपनी प्रकृति और कामना के अनुसार मार्ग चुनते हैं।
कृष्ण यहाँ यह स्पष्ट कर रहे हैं कि जो बिना किसी विशेष कामना के मेरे पास आता है वह ज्ञानी है। और जो कामना-वश किसी देवता के पास जाता है — उसकी अपनी यात्रा है।