यह गीता के सबसे प्रसिद्ध श्लोकों में से एक है। कृष्ण कहते हैं — अनेक जन्मों की साधना के अंत में जब ज्ञान परिपक्व हो जाता है, तब व्यक्ति जान लेता है कि वासुदेव ही सब कुछ है।
'वासुदेवः सर्वम्' — यह तीन शब्दों में पूरे अध्याय का सार है। जब यह बोध होता है कि हर जगह, हर रूप में, हर क्षण — वही एक है — तब यात्रा पूरी होती है।
और ऐसा महात्मा बहुत दुर्लभ है। यह 7.3 की बात फिर आती है — हजारों में एक। लेकिन यहाँ वह यात्रा पूरी हो चुकी है।