7.14 में कृष्ण ने कहा — जो मेरी शरण लेते हैं वे माया पार कर लेते हैं। अब वे कहते हैं — कौन शरण नहीं लेता? चार प्रकार के लोग — जो बुरे कर्म करते हैं, जो मोह में डूबे हैं, जिनका ज्ञान माया ने हर लिया, और जो आसुरी स्वभाव में रहते हैं।
यह श्लोक किसी को दोष देने के लिए नहीं है। यह एक चित्र है — जब तक मन इन अवस्थाओं में होता है, तब तक परमात्मा की ओर मुड़ना नहीं होता। यह बंधन का स्वरूप है।
लेकिन यह स्थायी नहीं है। अगले श्लोक में कृष्ण उन लोगों की बात करेंगे जो शरण लेते हैं। यह द्वार बंद नहीं है।