कृष्ण कहते हैं — चार प्रकार के पुण्यात्मा मेरी भक्ति करते हैं। पहला — आर्त (जो दुःख में है)। दूसरा — जिज्ञासु (जो जानना चाहता है)। तीसरा — अर्थार्थी (जो कुछ पाना चाहता है)। और चौथा — ज्ञानी।
यह श्लोक बहुत उदार है। कृष्ण यह नहीं कहते कि केवल ज्ञानी ही मेरे पास आएँ। दुःख में रोने वाला भी, जिज्ञासा से पूछने वाला बच्चा भी, कुछ माँगने वाला भी — सब मेरे पास आते हैं।
जैसे दादा की गोद में कोई रोते हुए आता है, कोई सवाल लेकर, कोई कुछ माँगने — दादा सबको स्वीकार करते हैं। परमात्मा भी ऐसा ही है।