कृष्ण कहते हैं — सभी प्राणियों का अनादि बीज मैं हूँ। जैसे हर पेड़ के भीतर एक बीज होता है जो उसे उगाता है, वैसे ही हर प्राणी के भीतर परमात्मा वह बीज-शक्ति है।
बुद्धिमानों में जो बुद्धि है — वह परमात्मा की ही देन है। जो छात्र परीक्षा में अच्छा सोचता है, जो बुजुर्ग सही निर्णय लेते हैं — उस बुद्धि के पीछे भी वही शक्ति है।
यह श्लोक अहंकार को शांत करता है। जो भी अच्छाई हम में है — बुद्धि हो या तेज — वह हमारा नहीं, वह परमात्मा का प्रकाश है जो हमारे भीतर चमक रहा है।