जिसने अपने मन को जीत लिया है, जो भीतर से शांत है — उसके हृदय में परमात्मा स्थिर होकर बस जाते हैं। उसे न सर्दी परेशान करती है न गर्मी, न सुख उछालता है न दुख तोड़ता है, न किसी की तारीफ फुलाती है न निंदा डुबाती है।
यह स्थिति एक पुराने और अनुभवी बुजुर्ग जैसी होती है — जो हर मौसम देख चुका हो, हर परिस्थिति झेल चुका हो। अब वह न अच्छे से बहुत खुश होता है, न बुरे से बहुत दुखी। यही परमात्मा की स्थिरता का संकेत है।