यह पूरे छठे अध्याय का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण श्लोक है। सब योगियों में कृष्ण किसे सबसे श्रेष्ठ मानते हैं? जो अंतरात्मा से उनमें रमे — यानी भीतर से, पूरे मन से — और श्रद्धा से उनकी उपासना करे।
यह 'युक्ततम' — सबसे अधिक युक्त — का पुरस्कार है। ध्यान-विधि, समत्व, साधना — सब बढ़िया हैं। पर जब ये सब श्रद्धामय भक्ति के साथ जुड़ें — तब वह सबसे पूर्ण योगी बन जाता है। यही गीता का अंतिम संदेश है।