अर्जुन का यह प्रश्न बड़ा मार्मिक है। मान लो किसी में श्रद्धा है — वह योग करना चाहता है — पर आलस या परिस्थितियों के कारण पूरा प्रयास नहीं हुआ। मन योग से भटक गया। योग की सिद्धि नहीं मिली। तो ऐसे व्यक्ति का क्या होता है?
यह प्रश्न बहुत मानवीय है। हम में से कितने ऐसे हैं — योग, ध्यान, साधना शुरू करते हैं पर पूरी नहीं हो पाती। अर्जुन उन सबकी ओर से यह प्रश्न कर रहा है।