कृष्ण यहाँ स्पष्ट कहते हैं — जिसने मन पर काबू नहीं किया, उसके लिए योग कठिन है। यह उनका निजी मत है। पर फिर वे आशा देते हैं — जो उपाय से — यानी सही विधि से — प्रयास करे और मन को साधने की कोशिश करे, उसके लिए योग सम्भव है।
यहाँ 'उपायतः' — उपाय से — बड़ा महत्वपूर्ण है। केवल कठोर प्रयास से नहीं, सही रास्ते से। सही गुरु, सही विधि, सही समय — यह सब उपाय हैं। जो इन उपायों से चले, उसके लिए दरवाजा बंद नहीं।