जो योगी मन को शांत कर लेता है, जिसका रजोगुण — यानी बेचैनी और क्रियाशीलता — शांत हो जाता है, जो पापरहित होकर ब्रह्म का रूप हो जाता है — उसे उत्तम सुख मिलता है।
यहाँ 'ब्रह्मभूत' एक महत्वपूर्ण शब्द है। इसका अर्थ है — ब्रह्म बन जाना, ब्रह्म हो जाना। यह अलगाव का नहीं, एकता का अनुभव है। जब बूँद समुद्र में मिल जाती है — वह समुद्र बन जाती है। ऐसी ही अवस्था।