यह ध्यान के अभ्यास का सबसे सरल और ईमानदार निर्देश है। मन भागेगा — यह तय है। कहाँ-कहाँ जाए? जहाँ-जहाँ जाए, वहाँ से उठाकर वापस आत्मा में लाओ। बार-बार। हर बार।
यह थकाने वाला काम लग सकता है। पर इसे इस तरह देखो — जैसे एक माँ अपने छोटे बच्चे को बार-बार उठाकर सही जगह बिठाती है। प्यार से, धैर्य से। मन के साथ भी ऐसे ही व्यवहार करो — क्रोध से नहीं, धैर्य से।