कृष्ण शरीर की मुद्रा बताते हैं। शरीर, सिर और गर्दन — तीनों को सीधी एक रेखा में रखो। न आगे झुको, न पीछे। न हिलो। दृष्टि नाक के अगले हिस्से पर टिका दो — न आँखें बंद, न इधर-उधर।
यह शारीरिक स्थिरता का निर्देश क्यों है? क्योंकि जब शरीर स्थिर होता है, मन भी स्थिर होने लगता है। जैसे पानी तब शांत होता है जब उसका बर्तन न हिले। शरीर रूपी बर्तन स्थिर हो, तो मन रूपी पानी शांत होता है।